Monday, 29 December 2008

Traditional Hindi Bhajan


इतना तो करना स्वामी जब प्रण तन से निकले
गोविंदा नाम लेके तब प्रण तन से निकले

श्री गंगाजी का तट हो यमुना का वंशीवट हो
मेरा संवारा निकट हो जब प्रण तन से निकले

पीताम्बरी कासी हो छवि मन में ये बसी हो
होंठों पे कुछ हसी हो जब प्रण तन से निकले

जब कंट प्रण ए कोई रोग न सताए
यामा दरस न दिखाए जब प्रण तन से निकले

उस वक्त जल्दी आना नहीं स्याम भुल जाना
राधे को साथ लाना जब प्रण तन से निकले

एक भक्त की हैं अर्जी खुदगर्ज़ की हैं गरजी
आगे तुम्हारी मर्ज़ी जब प्रण तन से निकले

इतना तो करना स्वामी जब प्रण तन से निकले

- Author Unknown

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